हमारे द्वारा पिछले कुछ समय में कई पूर्व मुखी वास्तु(मकान/फ्लैट)का विश्लेषण किया गया तो पाया पूर्व मुखी मकान /फ्लैट या दक्षिण-पूर्व कार्नर वाले भवनों के उपयोगकर्ता परिवारों में विशेष प्रकार का गुणधर्म देखने को मिला हालांकि पूर्व दिशा सुनते ही सब कुछ सकारात्मक विचार आने लगते हैं क्योंकि यह श्रेष्ठ दिशाओं में से एक है उसके बावजूद इस दिशा के भवनों में निर्माण की एक ऐसी स्थिति शोध में सामने आयी जिसके चलते पूर्व मुखी भवन /फ्लैट के उपयोगकर्ता परिवारों में कुछ विशेष प्रभाव देखने को मिले जैसे एक्सीडेंट, मानसिक परेशानी, डिप्रेशन, कहीं-कहीं परिवार के किसी एक सदस्य को लकवा, रक्त संबंधी रोग, दुर्घटना एवं कुछ विशेष परिस्थितियों में असामयिक मृत्यु(परिवार के खास सदस्य की) ।
आइए वास्तु शास्त्र अनुसार समझते हैं इस प्रकार के भवनों की निर्माण की वास्तु स्थिति : इस प्रकार के भवनों में जब पद-विन्यास किया गया तो पाया कि इस प्रकार के भवनों/फ्लैटों में मुख्यद्वार दक्षिण पूर्व के मृग, अंतरिक्ष,अग्नि,पूषा, वितथ आदि पदों पर बना हुआ मिला जिसके चलते भवन में ढलान अर्थात प्लव की व्यस्था स्वतः ही इन्ही मुख्य द्वार के पदों में हो गयी कुछ स्थानों पर भूमिगत जल की व्यस्था भी इन्ही पदों में थी ,साथ ही जो भवन जमीन से बने हुए थे उनमें सड़क का लेवल भवन के लेवल से ऊंचा था या लगभग बराबरी पर था वही कही- कही किचन की व्यवस्था या तो पूर्व उत्तर के अदिति, उदीती, ईश,पर्जन्य,जयंत आदि समस्त पदों को कवर करते देखने को मिली अब इस प्रकार की व्यवस्था में बैडरूम उत्तर-पश्चिम वायुवीय से पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम नैरत्य के विभिन्न पदों(मुख्य,नाग,वायु,रोग, शोष,असुर,वरुण से दौवारिक,पितृ से भृंगराज आदि) में देखने को मिले । इन दोनों ही स्थानों उत्तर पश्चिम वायुवीय और दक्षिण पश्चिम नैरत्य में बैडरूम होना अच्छा हैं पर सदस्यों अनुसार बैडरूम आवंटन की व्यवस्था विपरीत ही मिलेगी और ऐसी दोषित संपत्ति में मुख्य सदस्य अपना बैडरूम स्वतः ही मुख्य,नाग,वायु,शोष आदि पदों में करता है अब परिणाम यह होता है कि भवन में रहने आने के बाद कुछ 21 से 23 माह या 5 साल में कोई एक्सीडेंट,रक्त संबंधित कोई ऐसा रोग जिसमे नियमित दवाइयां लेने की आवश्यकता होती है शुरुआत हो जाती है (जैसे: उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल,डायबिटीस,नर्वस सिस्टम से संबंधित कोई रोग,थाइरोइड आदि) ऐसा अनुभव में देखने को आया है ।।
केस 1 : कुछ समय पूर्व उक्त बताई गई व्यस्था हमारे द्वारा एक फ्लैट में देखी गयी जानकारी में मालूम हुआ उक्त घर के मुख्य सदस्य के 4 से 5 बार एक्सीडेंट फ्लैट में आने के ढाई सालों में ही हो गए जिसके कारण जातक के कुछ आपरेशन हुए स्पाइन में समस्या आई जिसके चलते नव वैवाहिक जीवन भी डिस्टर्ब रहने लगा और जातक लगभग 3 साल शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद परेशान रहा और अंततः जातक द्वारा आत्महत्या कर ली गयी उक्त फ्लैट में जातक ने खुद के सोने की व्यस्था स्वतः उत्तर-पश्चिम वायुवीय के मुख्य,नाग,रोग,शोष आदि पदों में कर ली थी और साधना के लिए गुरु कक्ष दक्षिण पश्चिम नैरत्य के सुग्रीव,दौवारिक,पितृ आदि में कर दी थी जो एक पूर्णतः विपरीत व्यस्था थी ।
केस 2: एक अन्य केस में दक्षिण पूर्व के 40×60 के कॉर्नर वाले भवन में ऐसी ही व्यवस्था थी मुख्य द्वार गलत स्थान पर था भूमिगत जल की व्यवस्था भी अनुचित थी साथ ही दोनों और की सड़क भी भवन से ऊपर थी जिसमे परिवार के तीन बच्चों में से एक कन्या की शादी ही हो पाई और अन्य दो के विवाह अथक प्रयास के बाद भी नही हो पाए । जिस एक कन्या का विवाह हुआ था कुछ सालों में उसके पति द्वार भी ससुराल में किन्हीं कारणों से आत्महत्या कर ली गयी यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि इस कन्या के ससुराल का भवन एक पूर्व मुखी था और दोष उपरोक्त वाले ही थे और अग्नि और पूषा पद में दो बोरिंग थे । एक द्वार पूषा पद पर था रसोई घर दक्षिण पश्चिम में था और इस जोड़े का शयनकक्ष दक्षिण – पूर्व में था इस प्रकार यह कन्या भी पति की मृत्यु उपरांत पुनः अपने पिता के दोषित भवन में वापस लौट आयी । कहने का तात्पर्य है दोषित या दोष मुक्त संपत्ति भाग्य अनुसार प्राप्त होती है एवं व्यक्ति उसी अनुसार अपने प्रारब्ध(अच्छे एवम बुरे) को भोगता है भवन के वास्तु की स्थिति का गहन विश्लेषण कर आने वाले समय की स्थिति का सटीक अनुमान वास्तु शास्त्रों के सटीक सिद्धांतों के आधार पर लगाया जा सकता है ।
इन सबके अलावा एक विशिष्ट बात इस प्रकार के दोषित पूर्व मुखी या दक्षिण पूर्व कार्नर वाले भवनों में देखने को और मिली ऐसे पूर्व मुखी/दक्षिण पूर्व मुखी भवनों/फ्लैटों के परिवार के एक या अधिक सदस्य कुछ व्यसनों (जैसे: जुएं, सट्टे ,सुरा ,सुंदरी या अन्य प्रकार का नशा या अधिक धूम्रपान करने वाला आदि) में लिप्त मिलता है साथ ही बड़ी बड़ी बातें करना, बिना विचार करे दिखावे के लिए अधिक खर्चीला होना , दिखावा करना एवं स्वयं को श्रेष्ठ बताना ये गुणधर्म भी ऐसे भवनों के उपयोगकर्ता परिवारों में देखने मे मिलते हैं।
वस्तुविद गौरव गुप्ता
संस्थापक: वास्तु दुनिया ग्रुप.
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